Friday, November 11, 2022

UMRAH-1

 


 








1)   जब काबे पर पहली नजर पड़े तो कह –

   अल्लाहू अकबर, अल्लाहू अक़बर, अल्लाहू अक़बर, लाइलाहा इलल्लाह

2) एहराम की नियत  ?

3)  उमराह की नियत :

   O अल्लाह, मैं उमराह और हज करने का इरादा रखता हूं।

   अल्लाहुम्मा इन्नी उरिदुल हज्जा फा यस्सिर-हु ली व तक़ब्बल-हु मिन्नी

ऐ अल्लाह, मेरा इरादा उमराह और हज्ज करने का है, इसलिए उन्हें मेरे लिए आसान कर दो और उन्हें मुझसे क़ुबूल करो

   लब्बैक अल्लाहुम्मा उमरा / Labbayk Allahumma Umrah.

   O अल्लाह, मैंने उमराह करने के लिए मौजूद हु

4) तलबिया

ला इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह।

लब्बैका अल्लाहुम्मा लब्बैक, लब्बैका ला शरीका लका लब्बैक,

ईन्नल- हम्दा वन्निमता लका वल-मुल्क, ला शरीका लक

 

6)

7) तवाफ़ की नियत

“अल्लाहुम्मा इन्नी उरिदु तवाफ़ा……………….”

Allāhumma innī urīdu l-awwafa baytika l-arāmi fa yassirhu lī wa taqabbalhu minnī.

 

 ऐ अल्लाह, मैं उम्रा के लिए सात चक्कर तवाफ करने की नीयत करता हूं, मेरे लिये इसे आसान फरमा और इसे मेरी तरफ़ से क़बूल फ़रमा ।

 

अब का'बे को मुंह किये अपनी सीधी तरफ़ थोड़ा सा चल कर ह-जरे अस्वद के ठीक सामने आ जाएं दोनों हथेलियां इस तरह कानों तक उठाएं कि ह - जरे अस्वद की तरफ़ रहें और And पढ़ें:…….. …..

तर्जुमा :  अल्लाह के नाम से और तमाम खूबियां अल्लाह के लिये हैं और अल्लाह ..। बहुत बड़ा है , और अल्लाह Allah के रसूल  पर दुरूदो सलाम हों

ह - जरे अस्वद का इस्तिलाम करें (means to touch with the hand or the mouth)  और  इस्लामी भाई  शुरूअ के तीन फेरों में रमल करें.

इस्तिलाम करते वक़्त कहें :  बिमिललाही अल्लहु अकबर व लिल्लाहिल हम्द

 

तीन फेरों के बाद इस्लामी भाई भी दरमियानी    चाल से तवाफ़ करें , सात फेरे मुकम्मल करने के बाद आठवीं बार इस्तिलाम करें । अब सीधा कन्धा ढांप लें , हर तवाफ़ में फेरे सात और इस्तिलाम आठ होते हैं , अब अगर मक्रूह वक्त न हो तो अभी वरना बा'द में मस्जिदुल हराम में दो रक्अत नमाज़ वाजिबुत्तवाफ़ अदा करें , फिर मुल्तज़म पर दुआ मांगें । इस के बा'द किल्ला रू खड़े खड़े ज़मज़म शरीफ़ पियें ।

 

8) तवाफ करते वक्त तीसरा कलमा पढ़े :  सुब्हानल्लाही, वल् हम्दु लिल्लाहि, वला इलाहा इल्ल्लाहु वल्लाहु अकबर, वला हौला वला कूव्-व-ता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यील अजीम

 

रुक्ने यमानी (corner of Kaaba) पर यह दुआ पढ़े :

अल्लाहुम्मा इन्नी असअलुकल अफव वलआफिय -त –फ़िद्दुन्या ……  ….

 

9) रुक्ने यमानी to ह-जरे अस्वद यह दुआ :

रब्बना आतिना फिद्दुन्या हसनातौं व फिल आखिरती हसनतौं वकिना अजाबन नार

तर्जुमा: – ऐ हमारे रब्ब हमें दुनिया में नेकी और आख़िरत में भी नेकी दे और हमें दोज़ख ले अज़ाब से बचा।

 

जब तवाफ़ के बाद आबे ज़मज़म पी कर फारिग़ हों और सई के लिए जाने लगें तो फिर हजरे अस्वद पर जा कर नवीं मर्तबा इस्तेलाम करे यानि मौक़ा मिले तो हजरे अस्वद को बोसा दे वो भी ना हो सके तो हाथ या छड़ी वग़ैरा हजरे अस्वद को लगा कर उसको बोसा दें. वो भी ना हो सके तो हाथों को हजरे अस्वद के मुक़ाबिल कर के वोसा दें.

 

10) ज़मज़म का पानी पीकर यह दुआ पढ़ें:

अल्लाहुम्मा इन्नी अस अलुका इल्मन नाफ़िन, व रिज्कन वासिअन, व शिफ़ा अम मिन कुल्लि दाअ

तर्जुमा – ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नफ़ा देने वाले इल्म और फैली रोजी का सवाल करता हूं और हर रोग से सेहत पाने का सवाल करता हूं.

11) सई  :

सई के मानी चलने या दौड़ने के हैं और हज के दौरान सफ़ा और मरवा के दरमियान ख़ास तरीक़े से सात चक्कर लगाने को सई कहते हैं

(1)  सफ़ा व मरवा में सई के लिए फिर हजर-ए-असवद के पास आएं और उसी तरह तकबीर वग़ैरा कह कर चूमें और न हो सके तो उसकी तरफ़ मुँह करके और दुरूद शरीफ़ पढ़ते हुए फ़ौरन बाब-ए-सफ़ा से सफ़ा की तरफ़ रवाना हों।

(2)  सफ़ा पर  सई की नियत करना और दुआ करके सई शुरू करना

(3)  दौरान सई  चौथा कलमा पढ़ना या दुआए पढ़ना

(4)  सफ़ा से शुरू करना और मरवा पर ख़त्म करना

(5)  मर्दो के लिए मयलियन अख़्ज़रीन हरी लाइट के दरम्यान तेज चलना

(6)  सात चककर पुरे करना

(7)  सई पैदल करना

(8)  सफ़ा व मरवा  का  पूरा फासला तय करना

(9)  सई की हर चककर में सफा व् मरवा  पर दुआ करना

 

12)  सई की नियत :

अल्लाहूम्मा इन्नी उरिदूस सअय बैनस्सफा 

तर्जुमा: अल्लाह! बेशक मैं नीयत करता हूँ सफ़ा और मरवा के दरमियान सई के सात चक्करों की. मेरे लिये इसे आसान फरमा और इसे मेरी तरफ़ से क़बूल फ़रमा ।

सई करते वक़्त चौथा कलमा पढ़े:

ला इलाहा इल्लल्लाहु वाहदहु ला शारिका लहु,   लहुल मुल्कु वा लाहुल हमदु व हुआ अला कुली शाय इन क़दीर

13) सफ़ा और मरवा की दुआ:

बिस्मिल्लाही अबदऊ बिमा बदअल्लाह। ..

तर्जुमा:  मैं उससे शुरू करता हूँ जिसका अल्लाह ने पहले ज़िक्र किया बेशक सफ़ा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से हैं जिसने हज या उमरा किया उस पर उनके तवाफ़ में गुनाह नहीं और जो शख़्स नेक काम करे तो बेशक अल्लाह बदला देने वाला जानने वाला है।

फजर की नमाज, जोहर की नमाज, असर की नमाज़ , मगरिब की नमाज़ ईशा की नमाज 

14)

15) हल्क : वस्तरे से सर के बाल मुंडवाना या बाल कम करना. बाल मुंडवाते वक़्त एहराम उतरना नहीं हैं वरना दम वाज़िब हो जाएगा.

16. एहराम की पबंदियां :

1.       ★_गुस्ल से फारिग होकर अहराम बांधने से पहले खुशबू लगाना सुन्नत है ।

 

2.       ★_औरतों के लिए अहराम का कोई खास लिबास नहीं है आम लिबास पहन लें, चेहरे से कपड़ा हटा ले ,फिर नियत करके आहिस्ता से तलबिया पढ़ ले।

 

3.       ★_औरतें बालों की हिफाजत के लिए अगर सर पर बाल बांध लें तो कोई हर्ज नहीं , वज़ु के वक्त उसको निकालकर सर पर मसह जरूरी है।

 

4.       ★_अगर कोई औरत ऐसे वक्त में मक्का मुकर्रमा पहुंची कि माहावारी आ रही हो तो वह पाक होने तक इंतजार करें । पाक होने के बाद ही उमराह करने के लिए मस्जिदे हराम में जाए । उमराह की अदायगी तक उसको अहराम में ही रहना होगा।

 

5.       ★_अगर आप पहले मदीना मुनव्वरा जा रहे हैं तो मदीना मुनव्वरा जाने के लिए किसी अहराम की जरूरत नहीं है, लेकिन जब आप मदीना मुनव्वरा से मक्का मुकर्रमा जाएं तो फिर मदीना की मिक़ात पर अहराम बांधे।

 

6.       ★_अहराम की हालत में अगर एहतलाम हो जाए तो इससे अहराम में कोई फर्क नहीं पड़ता, कपड़ा जिस्म धोकर गुस्ल कर लें,  अगर अहराम की चादर बदलने की जरूरत हो तो दूसरी चादर इस्तेमाल करें लेकिन मियां बीवी वाले खास ताल्लुकात से बिल्कुल दूर रहे।

 

7.       *◆_एक अहम हिदायत_,* _ मिक़ात पहुंचकर या इससे पहले अहराम बांधना जरूरी है ।

8.       "_लेकिन अगर आप हवाई जहाज से जा रहे हैं और आपको जद्दा में उतरना है तो हवाई जहाज में सवार होने से पहले ही  अहराम बांध लें या हवाई जहाज में मिक़ात से पहले पहले बांध ले और अगर मौका हो तो 2 रकात भी अदा कर लें फिर नियत करके तलबिया पढ़ ले।

9.       ★_अहराम बांधने के बाद नियत करने और तलबिया पढ़ने में ताखीर की जा सकती है यानी आप एहराम हवाई जहाज में सवार होने से पहले बांध ले और नियत मिका़त आने से पहले करके तलबिया पढ़ ले।

 

10.    ★_ याद रहे कि नियत और तलबिया के बाद ही अहराम की पाबंदी शुरू होती है।

 

11.    *◆_ तम्बीह _,* _ अगर मिक़ात से बाहर रहने वाला ( जिसको आफाकी़ कहते हैं) बगैर अहराम मिक़ात से गुजर गया तो आगे जाकर किसी भी जगह अहराम बांध ले लेकिन उस पर एक दम लाज़िम हो गया।

 

12.    "_मसलन रियाद का रहने वाला बगैर अहराम के जद्दा पहुंच गया तो जद्दा या मक्का मुकर्रमा से अहराम बांधने पर एक दम देना होगा।  *#_ ममनूआते अहराम _#*

13.     अहराम बांधकर तलबिया पढ़ने के बाद यह चीजें हराम है:-

14.    खुशबू लगाना ,नाखून काटना,  जिस्म से बाल दूर करना , चेहरे का ढांकना, मियां बीवी वाले खास ताल्लुकात जिंसी सोहबत के काम करना ,खुश्की के जानवरों का शिकार करना।

 

15.    *#_सिर्फ मर्दों के लिए ममनू _#*_  सिले हुए कपड़े पहनना, सर को टोपी या कपड़े से ढंकना,  ऐसा जूता पहनना जिससे पांव की दरमियानी हड्डी छुप जाए।

 

16.    *#_मकरुहाते अहराम _#* _ बदन से मेल दूर करना , साबुन का इस्तेमाल करना , कंघा करना ।

 

17.    *#_अहराम की हालत में जायज़ उमूर_#* _  गुस्ल करना लेकिन खुशबूदार साबुन का इस्तेमाल ना करें। अहराम को धोना या बदलना । अंगूठी घड़ी चश्मा बेल्ट छतरी वगैरह का इस्तेमाल करना ।अहराम के ऊपर मजीद चादर डालकर सोना लेकिन मर्द अपने सर और चेहरे को और औरतें अपने चेहरे को खुला रखें।

 




 



1)Masjid Al Haram
2)Another Ziyarat Places in Mecca is Masjid Aisha-The Second largest Mosque in Mecca-
3.Jabal Al-Rahma
4.Jannat al-Mualla (Cemetery in Makkah)
5 Jabal Nur. The mount on which the Cave of Hira is found
6.Cave (ghar) of Hira
7. Cave of Thaur
8. Birth Place of the Holy Prophet [s]-National Library of Mecca
9. Masjid Jin
10 Masjid Bilal
11 Mount Abu Qubais
12.Muzdalifah
13.Masjid Al Khayf
14.Jamarat

1)Masjid Al Haram
The Kaaba in Islam simply marks the sacred space of gathering for Muslims and plays a role in the sacred rites and rituals of the pilgrimages of Hajj and Umrah. Kaaba is called Baitullah or the house of Allah.It is the delight of a Muslim. Every Muslim wish to see Kaaba and touch Hajr-e-Aswad with their hand. The rights and Rituals of Umrah is Known to every Pilgrim . So In Masjid Al Haram you will See Kaaba, Kiswa,Hajr-e- Aswad,Maqam e Ibrahim,,Safa and Marwah.And drink the Blesses ZamZam water.

2) Masjid Aisha:
Masjid Aisha is the closest of all the Miqats (boundary points) of the Haram.  It is the Place where People of Mecca Put Ihram and People doing subsequent Umrah renew their Ihram.  Masjid Al-Taneem is a mosque in the area of Al-Hil, about 5 miles away from the Kaaba, in the neighbourhood of At-Tan'im in Makkah, western Saudi Arabia.

3.Jabal Al-Rahma
Jabal Al-Rahma is a small hillock and it is from this platform that Prophet Muhammad, peace be upon him, delivered his unforgettable farewell sermon, enunciating far-reaching religious, economic, social and political reforms.  A small white pillar atop the hillock denotes the place where the Prophet stood more than 14 centuries ago.

4.Jannat al-Mualla (Cemetery in Makkah)
Jannat al-Mu'alla also known as the "Cemetery of Ma'la".   The Prophet [SAW] used to visit it frequently. It is the 2nd holiest graveyard after Baqi. Some of the People who are buried here are: Abd Manaf: Great, great-grandfather of the Holy Prophet [SAW]  Grave of Hashim: Great-grandfather of the Holy Prophet [SAW]  Grave of Abdul Muttalib: Grandfather of the Holy Prophet [SAW]  Grave of Amina: Mother of the Holy Prophet [SAW]

5) Jabal an-Nour 
Jabal an-Nour is a mountain near Mecca in the Hejaz region of Saudi Arabia. The mountain houses the grotto or cave of Hira', which holds tremendous significance for Muslims throughout the world.  JABAL AL-NOOR, or the Mountain of Light, is one of the most famous hills on earth. Its historical importance lies in the fact that the first verses of the Holy Qur'an were revealed to the Prophet Muhammad (peace be upon him) inside a cave at the summit of this hill on the outskirts of Makkah.

6) Cave (ghar) of Hira
A cave in Mount Hira (near Mecca) is the location where the Prophet Muhammad (peace be upon him) received his revelations from Allah SWT through the angel Gabriel. Prophet Muhammad (p.b.u.h) lived in this cave while he received messages from God and therefore refrained from leaving for prolonged periods of time.

7. Cave of Thaur:
The mountain is notable for housing a cave known as Ghār Thawr in which the Islamic prophet Muhammad took refuge from the Quraysh, during the migration to Medina.  According to Islamic legends, this cave is where the Holy Prophet and his companion Abu Bakr al-Siddiq found shelter when fleeing from Quraish search parties. It is believed to be a sacred and holy site that was used as a hideout by Prophet Mohammad and his companions before migration and took refuge here for three days and three nights.

8. Birth Place of the Holy Prophet [s]-National Library of Mecca:   It is the library in Masjid-e-Haram in Mecca.  The site is the birth place of Prophet Muhammad.   it is also known as Bayt al-Mawlid. This Prophet Muhammad's Birthplace in Makkah turned into a public library. 

9. Masjid Jin  :
Masjid Al Jinn is a small mosque located near Jannat Al-Mualla in Makkah. It is also known as the Mosque of Guards and the Mosque of Allegiance (Masjid al-Bayah). The Masjid is considered one of the oldest and most important mosques in the city.   The place where Masjid Al Jinn stands has been mentioned in the Quran in surah (chapter) Al-Jinn. It is built at a point where a large group of jinns gathered and listened to the Prophet Muhammad’s Peace Be Upon Him (PBUH) recitation of the Quran. Later, when the Prophet met with these jinns at this place, they embraced Islam and promised their allegiance to him. 








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